| Issue No: SPCL-2454-H-EC |
| Language: Hindi |
| Author: Sanjay Gupta,Tarun Kumar Wahi |
| Penciler: Studio Image |
| Inker: Sagar Thapa |
| Colorist: Sunil |
| Pages: 48 |
| गुरु को पहुंची चोट का दर्द वही समझ सकता है जिसने अपने गुरु को अपना खुदा माना हो| जिसने गुरु को खुदा माना हो वही उसकी शिक्षा को इबादत समझ कर बंद आँखों से लक्ष्य को बेधना सीख सकता है और ऐसे लक्ष्य बेधक डोगा के गुरु काली को किसी ने गोली मार दी है और कहा यह जा रहा है कि गुरु काली ने आत्महत्या कर ली है| अजब चक्रव्यूह है| वो काली चाचा जो गोलियों कि बारिश में से बिना किसी आड़ लिए बच निकल जाए| आखिर ऐसा कौन सूरमा आ गया जिसने उस धुरंधर को गोली मार दी| इस पर विश्वाश ना करें तो इस पर कैसे विश्वाश करें कि लाखों को आत्मविश्वाश का पाठ पढाने वाला, डोगा जैसे ज्वालामुखी के ईंधन का एक स्त्रोत्र आत्महत्या कर सकता है| असंभव है यह| गूढ़ पहेली है| और इसी पहेली को बूझने में फंसा हुआ है डोगा| |
| Issue No: SPCL-2439-H-EC |
| Language: Hindi |
| Author: Vivek Mohan |
| Penciler: Jang Bahadur |
| Inker: Gaurav Shrivastva |
| Colorist: Mohan Prabhu |
| Pages: 0 |
| नागद्वीप जहां विसर्पी की बुआ सुरसर्पा की प्रतिशोध की अग्नि ने असंभव कार्य को संभव कर दिखाया था| शांत नाग द्वीप में लड़ा गया था एक ऐतिहासिक महासंग्राम जिसने नागद्वीप की सम्राज्ञी विसर्पी को पराजय का मुंह दिखाया| पञ्च नाग और कालदूत जेसे धुरंधर सेना नायकों को पराजय को स्वाद चखना पड़ा| परिणाम स्वरुप नागद्वीप दो टुकडों मे विभाजित हो गया| अब विसर्पी फिर से अपनी शक्तियां संचित कर रही है और उसका साथ देने के लिए आ गया है नागराज भी| क्या नागराज विसर्पी को उसका खोया हुआ सम्मान और राजसिंहासन वापस दिला पायेगा? क्या सफल हो पाएगी नागराज की रणनीति? |
| Issue No: SPCL-2455-H-EC |
| Language: Hindi |
| Author: Anupam Sinha,Jolly Sinha |
| Penciler: Anupam Sinha |
| Inker: Sagar Thapa, Gaurav Shrivastava |
| Colorist: Sunil |
| Pages: 64 |
| महानगर को मिली है मेट्रो गेम्स की मेजबानी लेकिन कोई दुश्मन उन्हें असफल करने को प्रतिज्ञाबद्ध हो गया है और प्रसाशन उसे काबू करने में असफल साबित हो रहा है| देश की इज्जत भी दांव पर है साथ ही देशवासी भी त्रस्त हैं| ऐसे में नागराज ने देश की इज्जत और देशवासियों की समस्याओं की पतवार अपने हाथ मे संभाल ली यह कह कर कि नागराज है ना| इस महा खेल में शामिल हो गए हैं ऐसे अभ्यस्त खिलाड़ी जोकि नागराज जैसे महानायक के भी नाकों चने चबवा |
| Issue No: SPCL-2456-H-EC |
| Language: Hindi |
| Author: Sushant Panda |
| Penciler: Sushant Panda |
| Inker: Sushant Panda |
| Colorist: Sushant Panda |
| Pages: 64 |
| स्वर्ग में देवराज इंद्र के दरबार में छिड़ गई बहस कि बांकेलाल एक दुष्ट मानव है या एक नेक मानव है| इस बहस का हिस्सा बन गए बेदी जी भी| सभी देवता दो दलों मे विभाजित हो गए जो बेदी जी से पूछने लगे कि उनकी राय में किसे विशालगढ़ का राजा बनना चाहिए| बेदी जी देवताओं के इस विवाद मे बुरी तरह फंस गए| तभी नारद जी ने आ कर सूचना दी कि एक दैवीय योग के कारण अब बांकेलाल का राजा बनना निश्चित हो गया है| तब बेदी जी शिव कि कृपा से चमत्कारी शरीर ले कर जा पहुंचे विशालगढ़ बन कर बांकेलाल के चाचा बनाने के लिए उसे विशालगढ़ का राजा| |
| Issue No: SPCL-2437-H-EC |
| Language: Hindi |
| Author: Vivek Mohan |
| Penciler: Dildeep |
| Inker: Sagar Thapa |
| Colorist: Mohan Prabhu |
| Pages: 24 |
| मिस्र के पिरामिडों की इच्छाधारी नागिन सोडांगी के पूर्व जन्म और पिरामिडों के रहस्यों की एक अनोखी दास्तान| |
| Issue No: SPCL-2434-H-EC |
| Language: Hindi |
| Author: Vivek Mohan |
| Penciler: Hemant |
| Inker: Sagar Thapa |
| Colorist: Suresh |
| Pages: 0 |
| नागद्वीप के इतिहास में ऐसा युद्ध कभी नहीं लड़ा गया, जिसकी बिसात बिछ चुकी है| नागकुमारी विसर्पी से नागद्वीप का राज सिंहासन छीनने के लिए इस युद्ध की जड़ उसकी बुआ सुरसर्पा ने बजा दी है रणभेरी| सुरसर्पा की युद्ध पिपासा को भडका रहा है गुरु तान्त्रिश| गुरु तान्त्रिश के आह्वान पर सुरसर्पा के साथ जुड गए हैं विशाला, नागकर्ण, जैसे धुरंधर युद्ध नायक भी और उनकी सेना की दूसरी बड़ी शक्ती हैं सुरसर्पा के सौ बलशाली पुत्र सर्पशोले| हालांकि विसर्पी का साथ दे रहे हैं पञ्च नाग लेकिन गुरु तान्त्रिश की तंत्र शक्तियों के आगे सभी हैं बौने| इस युद्ध में विसर्पी के हिस्से में आणि ही है पराजय| |
| Issue No: SPCL-2432-H-EC |
| Language: Hindi |
| Author: Vivek Mohan |
| Penciler: Narayan |
| Inker: Gaurav |
| Colorist: Mohan Prabhu |
| Pages: 24 |
| अधूरे प्रेम के श्राप से शापित सोडांगी नागराज के प्रेम मे दीवानी है| इसी दीवानगी में कुछ खतरनाक गुंडों से लड़ती हुई सोडांगी बुरी तरह जख्मी हो जाती है| उसके उपचार के लिए उसे शैतान थोथ के पिरामिड मे ले जाया जाता है| यहाँ उसे मिलता है एक वरदान जिसके फल स्वरुप उसका विवाह नागराज से हो जाता है| लेकिन क्या उसका श्राप उसका पीछा छोड़ चुका है? या यह कोई माया है? |
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